Social Activity BSP
नई दिल्ली (Social Activity BSP)। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रक्षा रणनीति के बदलते समीकरणों के बीच भारत और साइप्रस के बढ़ते रिश्तों ने वैश्विक भू-राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हाल के दिनों में भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी को लेकर हुई बातचीत और रक्षा सहयोग की संभावनाओं ने खासतौर पर तुर्की की चिंता बढ़ा दी है। चर्चा इस बात की है कि भारत की अत्याधुनिक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अन्य रक्षा तकनीकें भविष्य में साइप्रस और संभावित रूप से ग्रीस तक पहुंच सकती हैं।
हाल ही में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साइप्रस दौरे के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया है। माना जा रहा है कि इस दौरे ने भारत-साइप्रस रक्षा सहयोग को नई गति दी है। हालांकि, ब्रह्मोस मिसाइल की किसी औपचारिक डील की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन रक्षा और रणनीतिक हलकों में संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है।
क्यों अहम है साइप्रस और ग्रीस?
विशेषज्ञों के अनुसार, पूर्वी भूमध्यसागर (Eastern Mediterranean) क्षेत्र में साइप्रस और ग्रीस का सामरिक महत्व काफी ज्यादा है। लंबे समय से तुर्की, ग्रीस और साइप्रस के बीच समुद्री सीमाओं, ऊर्जा संसाधनों और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसे में यदि भारत और साइप्रस के बीच रक्षा सहयोग बढ़ता है, तो इसका असर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, जो अपनी तेज रफ्तार और सटीक निशानेबाजी के लिए जानी जाती है, किसी भी देश की रक्षा क्षमता को काफी मजबूत कर सकती है। ऐसे में साइप्रस या ग्रीस द्वारा इस प्रणाली में रुचि दिखाना तुर्की के लिए रणनीतिक चिंता का विषय माना जा रहा है।
ब्रह्मोस और कामिकाजे ड्रोन में दिलचस्पी की चर्चा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साइप्रस की ओर से भारत के रक्षा उपकरणों, खासकर ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और कामिकाजे ड्रोन में रुचि दिखाई गई है। हालांकि, भारत सरकार या साइप्रस प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक खरीद समझौते की पुष्टि नहीं की गई है।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यदि भविष्य में ऐसा कोई रक्षा समझौता होता है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है। भारत पहले ही कई देशों के साथ रक्षा उपकरणों के निर्यात को बढ़ाने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रहा है।
तुर्की और पाकिस्तान के समीकरण पर असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्की और पाकिस्तान के करीबी रक्षा संबंधों को देखते हुए भारत-साइप्रस नजदीकियों को रणनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा सकता है। तुर्की ने कई मौकों पर पाकिस्तान का खुला समर्थन किया है, जबकि भारत ने अपने कूटनीतिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करने की दिशा में नए साझेदार तलाशे हैं।
हालांकि, विदेश नीति विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक समझौतों और सरकारी घोषणाओं का इंतजार करना जरूरी होगा। फिलहाल भारत-साइप्रस रिश्तों में बढ़ती गर्मजोशी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस जरूर छेड़ दी है।
रिपोर्ट :- शेख सरफराज़ अहमद





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